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Bulandshahr Accident: श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे का शिकार, 11 की मौत, 42 घायल

Bulandshahr Accident: श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे का शिकार, 11 की मौत, 42 घायल

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे 34 पर थाना अरनिया क्षेत्र के घटाल गांव के पास श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई। यह हादसा रात करीब 2 बजे हुआ जब एक तेज रफ्तार कंटेनर ने श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई और उसमें बैठे लोग बुरी तरह दब गए।

इस हादसे में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 42 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है। सभी श्रद्धालु कासगंज जिले से राजस्थान के गोगामेड़ी में स्थित गोगाजी मंदिर दर्शन के लिए निकले थे।

पुलिस ने जांच में पाया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली को डबल डेकर बना दिया गया था। ट्रॉली के बीच में लकड़ी लगाकर उसे दो हिस्सों में बांट दिया गया था ताकि अधिक से अधिक लोग बैठ सकें। इसी वजह से टक्कर के समय भीड़ के दबाव में हादसा और भी भयानक हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रॉली में बैठे लोग चारों ओर बिखर गए और मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे और तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों का हर संभव उपचार सुनिश्चित किया जाए और राहत कार्यों में तेजी लाई जाए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों को 50-50 हजार रुपए की मदद देने की घोषणा भी की है।

यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि सड़कों पर भीड़भाड़ वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली में श्रद्धालुओं को ले जाने की प्रथा कितनी खतरनाक हो सकती है। पुलिस ने इस मामले में कंटेनर चालक की तलाश शुरू कर दी है जो हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। प्रशासन का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाएगा।

यह दर्दनाक हादसा न सिर्फ मृतकों के परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि धार्मिक यात्राओं में सुरक्षा नियमों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है।

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