Vrindavan Corridor Protest: वृन्दावन में कॉरिडोर और न्यास के विरोध में अष्टपदी पाठ, महिलाओं ने जताया तीव्र आक्रोश

Vrindavan Corridor Protest: वृन्दावन में कॉरिडोर और न्यास के विरोध में अष्टपदी पाठ, महिलाओं ने जताया तीव्र आक्रोश
रिपोर्ट: आशीष कुमार
तीर्थ नगरी वृन्दावन में चल रहे कॉरिडोर और न्यास निर्माण के विरोध में शुक्रवार को आंदोलन लगातार 66वें दिन भी जारी रहा। इस क्रम में बिहारी जी मंदिर के चबूतरे पर बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने एकजुट होकर अष्टपदी पाठ का आयोजन किया और सरकार की इस योजना के विरुद्ध आवाज बुलंद की। “कॉरिडोर बहाना है, मंदिर का पैसा खाना है” और “कॉरिडोर यमुना पार” जैसे नारे लगाकर महिलाओं ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और ब्रज की परंपरा व आस्था की रक्षा का संकल्प दोहराया।
पूर्व नगर पालिका भाजपा प्रत्याशी श्रीमती साधना शर्मा ने आंदोलन में भाग लेते हुए कहा कि वृन्दावन की पवित्रता और आध्यात्मिकता के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “कॉरिडोर और न्यास की वृन्दावन को कोई आवश्यकता नहीं है। यह प्रयास विकास नहीं, बल्कि विनाश की ओर ले जाने वाला है। हमें बिहारी जी पर पूर्ण विश्वास है, वह स्वयं अपनी धरा की रक्षा करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “जो प्रभु हमारे आस्था के केंद्र हैं, वही हर बाधा से रक्षा करते हैं। पेड़ पर रखे घोंसलों को भी तेज हवाओं से गिरने नहीं देते, तो अपनी भक्त मंडली की रक्षा कैसे नहीं करेंगे?”
प्रदर्शन में भाग लेने वालीं ब्रजकुमारी गोस्वामी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक जीवित हैं, तब तक न कॉरिडोर बनने देंगे और न ही न्यास को स्वीकार करेंगे। “यह आंदोलन हमारी आत्मा की आवाज है, ठाकुर जी की मर्यादा और हमारे ब्रज की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हम अंत तक डटे रहेंगे,” उन्होंने कहा।
आंदोलनकारी महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कॉरिडोर की आड़ में सरकार का असली मकसद मंदिर की संपत्ति पर कब्जा जमाना है। उन्होंने देशभर के श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस योजना का विरोध करें और वृन्दावन की परंपरा को बचाने में अपना योगदान दें।
महिलाओं ने इस मौके पर सरकार को चेताया कि वे श्रद्धालुओं को भ्रमित करना बंद करे। आंदोलन की अगुवाई कर रहीं अन्य महिलाएं — मधु गोस्वामी, पूनम मिश्र, अदिति गोस्वामी, रितिका शर्मा, नीरू गोस्वामी, निशा शर्मा, श्रद्धा खंडेलवाल, नीलम गोस्वामी, श्यामा गोस्वामी और प्रीति गोस्वामी आदि — भी पूरे जोश से अपनी बात रखते हुए सरकार के फैसले के विरोध में डटी रहीं।