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Illegal Sand Mining Delhi: बुराड़ी और जगतपुर में अवैध रेत खनन पर सियासत तेज, सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार को घेरा

Illegal Sand Mining Delhi: बुराड़ी और जगतपुर में अवैध रेत खनन पर सियासत तेज, सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार को घेरा

दिल्ली में अवैध रेत खनन को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने राजधानी की दिल्ली सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बुराड़ी और जगतपुर इलाके में खुलेआम अवैध रेत खनन जारी है और प्रशासन आंख मूंदकर बैठा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यह सब कुछ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के स्पष्ट आदेशों और सख्त आपत्तियों के बावजूद हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बुराड़ी और जगतपुर में लंबे समय से अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है, जिससे यमुना के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध गतिविधि को रोकने के लिए एनजीटी ने कई बार दिल्ली पुलिस और मुख्य सचिव को सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। एनजीटी के समक्ष सरकार की ओर से यह दावा किया गया था कि इन इलाकों में रेत खनन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जबकि हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है।

आप नेता ने कहा कि आज भी इन क्षेत्रों में भारी मशीनों और ट्रकों के जरिए अवैध रेत खनन धड़ल्ले से जारी है। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि यमुना नदी की जैव विविधता और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एनजीटी जैसे संवैधानिक और न्यायिक संस्थान के आदेशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा।

सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि अवैध रेत खनन केवल पर्यावरणीय अपराध नहीं है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होती है। भारी वाहनों की आवाजाही से स्थानीय लोगों को परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

आप नेता ने दिल्ली सरकार और प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने की भी अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। इस मुद्दे के सामने आने के बाद दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक लापरवाही और कानून के पालन को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।

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