Doda Road Accident : खन्नी टॉप की बर्फीली ढलान बनी काल, ब्लैक आइस ने छीन ली 10 जवानों के परिवारों की खुशियां

Doda Road Accident : खन्नी टॉप की बर्फीली ढलान बनी काल, ब्लैक आइस ने छीन ली 10 जवानों के परिवारों की खुशियां
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को हुआ दर्दनाक सड़क हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा इंतजामों की कमी और प्रकृति की कठोरता की भयावह तस्वीर बनकर सामने आया है। डोडा के भद्रवाह क्षेत्र स्थित खन्नी टॉप की बर्फीली ढलान पर हुए इस हादसे में देश की रक्षा में तैनात 10 जवान शहीद हो गए, जिससे उनके परिवारों के सपने हमेशा के लिए बिखर गए।
खन्नी टॉप एक ऊंचाई पर स्थित इलाका है, जहां सर्दियों के मौसम में तापमान लगातार शून्य से नीचे चला जाता है। गुरुवार को जब यह हादसा हुआ, तब भीषण ठंड के बीच जवान अपने कर्तव्य की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सेना का बुलेटप्रूफ वाहन अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के बाद मौके का मंजर इतना भयावह था कि हर आंख नम हो गई।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हादसे का सबसे बड़ा कारण सड़क पर जमी ‘ब्लैक आइस’ बनी। ब्लैक आइस दरअसल सड़क पर जमी बर्फ की एक ऐसी पतली और पारदर्शी परत होती है, जो दिखाई नहीं देती लेकिन बेहद फिसलन भरी होती है। भद्रवाह की इन ऊंची चोटियों पर रात के समय तापमान माइनस में चला जाता है। बुधवार रात यहां तापमान माइनस 1.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। पहाड़ों से रिसता पानी और रात का पाला मिलकर सड़क पर कांच जैसी फिसलन भरी परत बना देता है, जिसे ड्राइवर समय रहते पहचान नहीं पाता।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे वाली जगह के पास एक छोटा नाला है, जिसका पानी सड़क पर फैल गया था। रात में तापमान गिरने के कारण वही पानी जमकर ब्लैक आइस में तब्दील हो गया। गुरुवार दोपहर तक भी धूप की कमी के कारण वह बर्फ पिघल नहीं सकी। जैसे ही वाहन उस मोड़ पर पहुंचा और चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, टायरों ने सड़क से पकड़ खो दी और भारी बुलेटप्रूफ वाहन फिसलता हुआ गहरी खाई में जा गिरा।
हादसे के बाद एक और गंभीर सच्चाई सामने आई। जिस खतरनाक मोड़ पर यह दुर्घटना हुई, वहां न तो कोई मजबूत पैराफिट दीवार थी और न ही क्रैश बैरियर। सड़क के किनारे चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर या रात में चमकने वाले संकेतक भी मौजूद नहीं थे। जानकारों का मानना है कि अगर सड़क के किनारे कंक्रीट का मजबूत पैराफिट या क्रैश बैरियर होता, तो शायद वाहन को खाई में गिरने से रोका जा सकता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खन्नी टॉप और आसपास की सड़कों की हालत लंबे समय से खराब है। संकरे और जर्जर पहाड़ी रास्तों पर भारी वाहनों का चलना हर वक्त जान का जोखिम बना रहता है। सर्दियों में इन इलाकों में ब्लैक आइस आम समस्या है, लेकिन इसके बावजूद समय पर सैंडिंग, नमक छिड़काव या चेतावनी व्यवस्था नहीं की जाती।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर और मौसम से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत है। देश के लिए जान कुर्बान करने वाले इन 10 वीरों की शहादत अब पूरे सिस्टम से जवाब मांग रही है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा असहनीय दर्द न झेलना पड़े।



