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पंजाबी सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 का आईजीएनसीए में भव्य आयोजन, संस्कृति और सामाजिक एकता का दिया संदेश

पंजाबी सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 का आईजीएनसीए में भव्य आयोजन, संस्कृति और सामाजिक एकता का दिया संदेश

राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आयोजित “पंजाबी सांस्कृतिक सम्मेलन 2026” भव्यता, सांस्कृतिक रंगों और सामाजिक सौहार्द का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। इस कार्यक्रम का आयोजन यूनाइटेड नेशन वेलफेयर फाउंडेशन (UNWF) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से आए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, कलाकारों और गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता कर पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं श्री गणेश वंदना के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन में श्री गुरुजी जय नारायण जी, यूएनडब्ल्यूएफ के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष, श्री डी.पी. पंवार, डॉ. कनिष्क यादव (नर्सिंग विभागाध्यक्ष, एम्स), श्री सोनू, एडवोकेट डॉ. प्रियंका अरोड़ा, श्री संजय शर्मा, श्रीमती वर्षा जायसवाल तथा यूएनडब्ल्यूएफ टीम के अन्य सदस्यों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में ही आध्यात्मिक वातावरण उस समय और अधिक दिव्य हो गया जब श्री गुरुजी जय नारायण जी ने बिना शंख के अपने मुख से शंखनाद की अद्भुत ध्वनि प्रस्तुत की। उनकी इस अनूठी कला ने पूरे सभागार को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक भाव से भर दिया। उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति की जोरदार सराहना की।

इस अवसर पर परफेक्ट ग्रुप के संस्थापक एवं निदेशक रामावतार किला ने विशेष अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और आयोजन की भव्यता एवं उद्देश्य की प्रशंसा की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अनिल गोयल उपस्थित रहे। वे दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड के निदेशक/अध्यक्ष तथा ईस्ट दिल्ली डेवलपमेंट कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पंजाब की संस्कृति केवल एक राज्य की पहचान नहीं बल्कि पूरे देश की शान है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने, युवाओं को अपनी जड़ों से परिचित कराने तथा भाईचारे को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

डॉ. अनिल गोयल ने विशेष रूप से एडवोकेट डॉ. प्रियंका अरोड़ा की सराहना करते हुए कहा कि वे लंबे समय से सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. प्रियंका अरोड़ा ने समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने के लिए अनेक सफल सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है और उनका योगदान वास्तव में प्रेरणादायक है।

सम्मेलन में पंजाबी लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने पंजाब की जीवंत संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का एक विशेष एवं गौरवपूर्ण क्षण वह रहा जब लेखराज जी के नाम की आधिकारिक घोषणा यूएनडब्ल्यूएफ के संरक्षक के रूप में की गई। इस घोषणा का उपस्थित जनसमूह ने गर्मजोशी और जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया।

इस अवसर पर डॉ. अमरिंदर सिंह मलिहा एवं डॉ. कनिष्क यादव की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष सम्मान प्रदान किया। दोनों अतिथियों ने UNWF द्वारा समाज और संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित आलोक मिश्रा एवं घेवर चंद ने अपने प्रेरणादायक विचार साझा करते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता पर बल दिया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन श्री सोनू एवं श्रीमती पूनम शर्मा ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया। उनकी सहज शैली, आत्मविश्वास और शानदार प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित बना दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर एडवोकेट डॉ. प्रियंका अरोड़ा ने सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यूएनडब्ल्यूएफ का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्था भविष्य में भी संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक सेवा के माध्यम से लोगों को जोड़ने का कार्य निरंतर करती रहेगी। उन्होंने दिल्ली सरकार की पंजाबी अकादमी एवं उर्दू अकादमी का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही यह आयोजन इतनी भव्यता और सफलता के साथ सम्पन्न हो सका।

कार्यक्रम के अंत में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले अतिथियों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक सौहार्द, भाईचारे और सामाजिक एकता के संदेश के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।

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