
Fake Income Tax Raid: अजमेर में फर्जी IT अधिकारी बनकर कारोबारी के घर से 3 करोड़ के जेवर लूटे, तीन घंटे में 6 आरोपी गिरफ्तार; पूर्व कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड
राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद में फर्जी इनकम टैक्स अधिकारी बनकर कारोबारी के घर में घुसे बदमाशों ने कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 की सुबह हुई इस वारदात में आरोपी काली स्कॉर्पियो से पहुंचे थे। उन्होंने खुद को इनकम टैक्स विभाग का अधिकारी बताया और जांच के नाम पर घर की तलाशी लेने लगे। परिवार के सदस्यों को एक जगह बैठाकर आरोपियों ने लॉकर से जेवर निकाले और मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब तीन घंटे के भीतर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात की साजिश रचने वालों में कारोबारी के घर पहले काम कर चुका एक पूर्व कर्मचारी भी शामिल है।
यह घटना नसीराबाद के महेश विहार कॉलोनी में हुई। शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे काले रंग की स्कॉर्पियो कारोबारी के घर के बाहर आकर रुकी। उसमें सवार लोग प्रशासनिक अधिकारियों जैसा पहनावा पहनकर पहुंचे थे। आरोपियों में से कुछ ने सफेद कपड़े पहन रखे थे और वे खुद को इनकम टैक्स विभाग का अधिकारी बताकर घर के भीतर दाखिल हुए। उनकी बातों और पहनावे से परिवार के लोगों को शुरुआत में शक नहीं हुआ। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर जांच के नाम पर घर के कमरों की तलाशी शुरू कर दी।
आरोपियों ने परिवार के सदस्यों को एक जगह बैठा दिया और घर में रखे सामान की जांच करने का नाटक किया। इसी दौरान वे लॉकर तक पहुंचे और उसमें रखे सोने-चांदी के आभूषण एक बैग में भर लिए। पुलिस के अनुसार, बदमाश घर से मोबाइल फोन भी ले गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी सामान लेकर बाहर निकलने लगे। जब कारोबारी के बेटे कार्तिक माहेश्वरी ने उनसे जब्त किए जा रहे सामान की रसीद मांगी, तो उन्हें शक हुआ। इसके बाद आरोपी जल्दबाजी में स्कॉर्पियो में बैठकर फरार हो गए।
मामले की शुरुआती जांच में पुलिस को परिवार के परिचित लोगों की भूमिका पर संदेह हुआ। पुलिस के मुताबिक, देवेन्द्र नाम का आरोपी पहले वर्ष 2016 से 2021 तक कारोबारी के घर में काम कर चुका था। इस वजह से उसे घर, परिवार और वहां रखे सामान की जानकारी थी। उसका साथी संजय रावत भी परिवार से परिचित बताया गया है। पुलिस को आशंका है कि घर की जानकारी का इस्तेमाल कर लूट की योजना तैयार की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर करीब एक महीने तक वारदात की तैयारी की थी और अन्य लोगों को भी अपने साथ शामिल किया था।
वारदात की सूचना मिलने के बाद अजमेर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देश पर जिले में नाकाबंदी कराई गई। पुलिस टीमों ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों का पता लगाने का प्रयास किया। साइबर सेल और विशेष पुलिस टीमों को भी जांच में लगाया गया। इन प्रयासों के बाद पुलिस ने वारदात के करीब तीन घंटे के भीतर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 33 वर्षीय देवेन्द्र कोली, 34 वर्षीय संजय रावत, 40 वर्षीय रविकांत कोली उर्फ रवि, 26 वर्षीय अमित, 39 वर्षीय तारू रैगर और 20 वर्षीय देवेन्द्र सिंह रावत के रूप में हुई है। पुलिस इन सभी से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य लूटे गए आभूषणों की बरामदगी, वारदात में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का पता लगाना और फरार सहयोगियों को गिरफ्तार करना है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर पांच लोगों के घर में प्रवेश करने और एक व्यक्ति के वाहन में रहकर भागने में मदद करने की योजना के तहत आए थे।
इस घटना की तुलना बॉलीवुड फिल्म ‘स्पेशल 26’ से की जा रही है, जिसमें फर्जी अधिकारी बनकर छापेमारी करने वाले लोगों की कहानी दिखाई गई थी। नसीराबाद की घटना में भी आरोपियों ने सरकारी अधिकारी होने का दिखावा कर परिवार का भरोसा जीतने की कोशिश की और तलाशी के बहाने कीमती सामान ले गए। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने तेजी से जांच करते हुए कुछ ही घंटों में छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो, आरोपियों की गतिविधियों और कथित साजिश के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही लूटे गए आभूषणों की सही कीमत और बरामदगी की स्थिति की पुष्टि की जा रही है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस वारदात में कुल कितने लोग शामिल थे और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति भी था।



