Cancer Medicines Missing: दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट से लाखों रुपये के इंजेक्शन गायब, 35 हजार टैबलेट लापता होने की भी चर्चा; FIR दर्ज

Cancer Medicines Missing: दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट से लाखों रुपये के इंजेक्शन गायब, 35 हजार टैबलेट लापता होने की भी चर्चा; FIR दर्ज
दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट से महंगी दवाएं गायब होने का मामला सामने आया है। अस्पताल की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन गायब मिलने के बाद अस्पताल में दवाओं के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गायब हुए इंजेक्शनों में से प्रत्येक की कीमत निजी बाजार में लाखों रुपये तक हो सकती है। हालांकि, अस्पताल ने पुलिस को दी गई शिकायत में इन दवाओं की खरीद कीमत का विवरण नहीं दिया है।
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के कीमो डे केयर विभाग में रखे फ्रिज से निमोटुजुमैब के चार इंजेक्शन गायब मिले। अस्पताल के विभागाध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज त्यागी ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि 6 अक्टूबर को विभाग के फ्रिज में रखे इंजेक्शन नहीं मिले। निमोटुजुमैब का इस्तेमाल सिर और गर्दन समेत कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। दवा की अधिक कीमत को देखते हुए इसके गायब होने के मामले को गंभीर माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इंजेक्शन कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए।
इस मामले के साथ अस्पताल से करीब 35 हजार सोफोसबुविर टैबलेट गायब होने की बात भी सामने आई है। सोफोसबुविर का इस्तेमाल हेपेटाइटिस-सी के इलाज में किया जाता है। बाजार में 400 मिलीग्राम की 28 टैबलेट वाली एक स्ट्रिप की कीमत लगभग 10 हजार से 13 हजार रुपये बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल की ओर से दर्ज कराई गई लिखित शिकायत में इन टैबलेट का उल्लेख नहीं है। ऐसे में जांच के दौरान यह सत्यापित किया जाएगा कि टैबलेट वास्तव में गायब हुई हैं या नहीं और इस संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।
अस्पताल की शिकायत मिलने के बाद जीटीबी एन्क्लेव थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस दवाओं के भंडारण, उनकी उपलब्धता के रिकॉर्ड और स्टॉक के रखरखाव से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि दवाएं कब से गायब थीं और स्टॉक की नियमित जांच के दौरान इस कमी का पता क्यों नहीं चला। फिलहाल किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।



