CJP Tiranga March: कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के बीच व्यापारियों ने किया विरोध, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में लगाए नारे

CJP Tiranga March: कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के बीच व्यापारियों ने किया विरोध, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में लगाए नारे
दिल्ली के कनॉट प्लेस में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च के बीच व्यापारियों का एक समूह भी सड़क पर उतर आया। पालिका बाजार के दुकानदारों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारेबाजी की और CJP के प्रदर्शन का विरोध किया। व्यापारियों ने दिल्ली पुलिस के समर्थन में भी नारे लगाए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी सुनाई दिए। एक ही इलाके में प्रदर्शनकारियों और व्यापारियों की अलग-अलग गतिविधियों के चलते कनॉट प्लेस में राजनीतिक और सामाजिक हलचल देखने को मिली।
CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने का ऐलान किया था। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाने की बात कही थी। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है। CJP का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी ने अपने दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में भी इस मार्च का आह्वान किया था।
मार्च के बीच पालिका बाजार के व्यापारियों का कनॉट प्लेस पहुंचना चर्चा का विषय रहा। व्यापारियों ने CJP के विरोध प्रदर्शन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में उनकी अपनी आवाज है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारे लगाने के साथ पुलिस के समर्थन में भी अपनी बात रखी। इस दौरान व्यापारियों की ओर से लगाए गए नारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन भी शामिल था। इस घटनाक्रम ने साफ किया कि तिरंगा मार्च को लेकर कनॉट प्लेस में केवल CJP के समर्थक ही सक्रिय नहीं थे, बल्कि इसके विरोध में भी लोग अपनी बात रख रहे थे।
व्यापारियों की चिंता का एक बड़ा कारण कनॉट प्लेस का व्यावसायिक महत्व भी है। यह दिल्ली के प्रमुख बाजारों और कारोबारी केंद्रों में शामिल है, जहां त्योहारों के मौसम में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है। प्रदर्शन की घोषणा के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई, बैरिकेडिंग की गई और यातायात को नियंत्रित करने के इंतजाम किए गए। ऐसी परिस्थितियों में दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होने और कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। व्यापारियों का कहना रहा है कि विरोध प्रदर्शन के लिए ऐसी जगह चुनी जानी चाहिए, जहां आम कारोबार और लोगों की आवाजाही कम से कम प्रभावित हो।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को नोटिस दिया था और उन्हें लागू निषेधाज्ञा का पालन करने के लिए कहा था। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बावजूद कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर लोगों के पहुंचने और प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों की खबरें सामने आती रहीं। इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी और सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया था। पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए।
CJP का प्रदर्शन जहां मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवालों से जुड़ा था, वहीं व्यापारियों ने कारोबारी गतिविधियों और पुलिस व्यवस्था के समर्थन में अपनी स्थिति जाहिर की। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर पक्ष रखा है कि इसमें मृत, स्थान बदल चुके और सत्यापन के दौरान नहीं मिल पाए मतदाताओं के नाम भी शामिल हैं। ऐसे में SIR को लेकर राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक पक्ष के बीच बहस जारी है। कनॉट प्लेस में हुए इस घटनाक्रम ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार, बाजारों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन की जरूरत को भी सामने रखा है।



