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Hafiz Saeed: NIA की बड़ी कामयाबी, दो महीने में दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी; कश्मीर में आतंकियों को हथियार और फंड देने का आरोप

Hafiz Saeed: NIA की बड़ी कामयाबी, दो महीने में दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी; कश्मीर में आतंकियों को हथियार और फंड देने का आरोप

नई दिल्ली। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कानूनी शिकंजा और कस दिया है। जम्मू की विशेष NIA अदालत ने हाफिज सईद के खिलाफ एक और गैर-जमानती वारंट जारी किया है। पिछले दो महीनों के भीतर उसके खिलाफ जारी यह दूसरा गैर-जमानती वारंट है। ताजा मामला जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को कथित तौर पर हथियार, पैसा और निर्देश उपलब्ध कराने से जुड़ा है।

NIA ने अदालत को बताया कि हाफिज सईद फिलहाल पाकिस्तान में मौजूद है और जानबूझकर भारतीय कानून की पहुंच से बच रहा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पाकिस्तान में रहते हुए भी वह जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को हथियार, आर्थिक मदद और निर्देश उपलब्ध कराने में भूमिका निभा रहा है।

विशेष NIA अदालत के जज प्रेम सागर ने एजेंसी की अर्जी पर सुनवाई के बाद हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी किया।

अदालत के सामने NIA ने कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की कथित भूमिका सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक वह फरार आरोपी है और सामान्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए उसकी अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित नहीं हो सकी है।

यह मामला इस साल श्रीनगर के बाहरी इलाके पंडाच में हुई एक कार्रवाई के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ा है। सुरक्षाबलों ने चेकिंग के दौरान मोहम्मद नकीब भट नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा था।

जांच एजेंसी के मुताबिक उसके पास से चीन निर्मित एक ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इसके बाद जकूरा पुलिस स्टेशन में UAPA, आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

शुरुआती जांच आगे बढ़ने के साथ सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़े कथित आतंकी नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद मामले में कई अन्य संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका की जांच की गई।

NIA के मुताबिक जांच के दौरान लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से कथित तौर पर जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में दो पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। एजेंसी का दावा है कि पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सीमा पार से संचालित किए जा रहे नेटवर्क की कड़ियां सामने आईं।

इसी जांच के दौरान हाफिज सईद की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया। NIA का आरोप है कि गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकियों के संबंध हाफिज सईद से थे।

जांच एजेंसी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक हथियार और फंड पहुंचाने के साथ उन्हें निर्देश देने में भी सीमा पार बैठे हैंडलरों की भूमिका की जांच की जा रही है।

NIA ने अदालत के सामने हाफिज सईद को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का निवासी बताया। एजेंसी का कहना है कि वह वर्तमान में पाकिस्तान में मौजूद है और गिरफ्तारी से बच रहा है।

जांच एजेंसी ने अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी, ताकि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को बढ़ाया जा सके।

अदालत ने उपलब्ध सामग्री और NIA की दलीलों पर विचार करने के बाद हाफिज सईद के खिलाफ सामान्य गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।

हाफिज सईद के खिलाफ पिछले दो महीने में जारी यह दूसरा गैर-जमानती वारंट है। इससे पहले 8 जुलाई 2026 को भी जम्मू की विशेष NIA अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

पहला वारंट पहलगाम आतंकी हमले से संबंधित मामले में जारी किया गया था। NIA ने उस मामले की जांच में भी हाफिज सईद को आरोपी बनाया है।

पहलगाम हमले के मामले में NIA ने जुलाई 2026 में एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। जांच एजेंसी ने इसमें हाफिज सईद की कथित भूमिका का उल्लेख किया था।

NIA का आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों के शीर्ष लोग जम्मू-कश्मीर में सक्रिय नेटवर्क के जरिए हिंसक गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश करते रहे हैं।

ताजा मामले में जांच का फोकस आतंकियों तक हथियार पहुंचाने, फंडिंग करने और उन्हें निर्देश देने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान करने पर है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सीमा पार से भेजे गए कथित निर्देश स्थानीय स्तर पर किन लोगों तक पहुंचते थे और इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने में कौन-कौन शामिल था।

हथियारों की सप्लाई चेन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंडाच में पकड़े गए आरोपी से चीन निर्मित ग्रेनेड और जिंदा कारतूस मिलने के बाद इस नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश तेज हुई थी।

जांच आगे बढ़ने के बाद कई गिरफ्तारियां हुईं और NIA ने मामले को अपने हाथ में लेकर व्यापक स्तर पर जांच शुरू की।

हाफिज सईद लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की वांछित सूची में शामिल है। भारत उसे 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों की साजिश से भी जोड़ता रहा है।

ताजा गैर-जमानती वारंट ऐसे समय जारी हुआ है जब NIA जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है।

दो महीने के भीतर दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी होना हाफिज सईद के खिलाफ भारत में चल रही कानूनी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पहला वारंट पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े मामले में था, जबकि ताजा वारंट कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को कथित रूप से हथियार, फंड और निर्देश उपलब्ध कराने से संबंधित अलग जांच में जारी हुआ है।

NIA का कहना है कि हाफिज सईद पाकिस्तान में मौजूद है और गिरफ्तारी से बच रहा है। ऐसे में उसके खिलाफ भारतीय कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल NIA इस कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, हथियारों की सप्लाई, आर्थिक लेन-देन और सीमा पार बैठे हैंडलरों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

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