Delhi Crime: क्राइम ब्रांच ने पैन इंडिया ऑनलाइन निवेश ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया, चार बड़े साइबर अपराधी गिरफ्तार

Delhi Crime: क्राइम ब्रांच ने पैन इंडिया ऑनलाइन निवेश ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया, चार बड़े साइबर अपराधी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की आईएससी टीम ने देशभर में फैले एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए चार मुख्य साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लंबे समय से पैन इंडिया स्तर पर सक्रिय था और फर्जी ट्रेडिंग ऐप, नकली आईपीओ स्कीम और हाई-वॉल्यूम म्यूल बैंक खातों के जरिए आम नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क से 300 से अधिक एनसीआरपी साइबर क्राइम शिकायतें जुड़ी हुई हैं, जिससे गिरोह के व्यापक और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी शेल कंपनियों और फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और इन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों के जरिए निवेश के नाम पर पीड़ितों से पैसा जमा कराया जाता था और फिर रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता था, ताकि ट्रांजेक्शन का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देते थे। फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और नकली आईपीओ स्कीम दिखाकर निवेश के लिए लोगों को फंसाया जाता था। कई मामलों में पीड़ितों को शुरुआती दौर में थोड़ा मुनाफा दिखाया जाता था, जिससे उनका भरोसा बढ़ता था और बाद में उनसे बड़ी रकम निवेश करवा कर पूरी राशि हड़प ली जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह तकनीकी रूप से काफी शातिर था। आरोपी अपने डिजिटल ट्रेल को छिपाने के लिए अलग-अलग राज्यों में सिम कार्ड, बैंक खाते और फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे। लेन-देन को जटिल बनाने के लिए कई लेयर में ट्रांजेक्शन किए जाते थे, जिससे पैसे के असली स्रोत और अंतिम ठिकाने तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
क्राइम ब्रांच की आईएससी टीम ने तकनीकी सर्विलांस, बैंक ट्रांजेक्शन एनालिसिस और एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज सैकड़ों शिकायतों के डेटा के आधार पर इस पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया। लगातार छानबीन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद पुलिस ने चार प्रमुख साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, खातों और ठगी की कुल रकम का पता लगाने में जुटी हुई है।



