Delhi Controversyi: अफ्रीकी नागरिक को हिंदी सीखने की चेतावनी देने वाले बीजेपी पार्षद के बयान पर बढ़ा विवाद, वायरल वीडियो के बाद आई सफाई

Delhi Controversyi: अफ्रीकी नागरिक को हिंदी सीखने की चेतावनी देने वाले बीजेपी पार्षद के बयान पर बढ़ा विवाद, वायरल वीडियो के बाद आई सफाई
राजधानी दिल्ली में एक बीजेपी पार्षद द्वारा अफ्रीकी मूल के नागरिक को हिंदी सीखने की चेतावनी देने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पटपड़गंज वार्ड से बीजेपी पार्षद रेनू चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक सार्वजनिक पार्क में बच्चों को फुटबॉल सिखाने वाले विदेशी कोच को एक महीने के भीतर हिंदी सीखने का अल्टीमेटम देती नजर आ रही हैं। वीडियो में पार्षद यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि अगर कोच हिंदी नहीं सीखेगा तो उसे पार्क में फुटबॉल सिखाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक करार दिया।
विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी पार्षद रेनू चौधरी ने अपने बयान पर सफाई जारी की है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी विदेशी नागरिक को धमकाना या अपमानित करना नहीं था, बल्कि पार्क में संवाद से जुड़ी समस्याओं को दूर करना था। पार्षद के अनुसार, जिस पार्क में विदेशी कोच बच्चों को प्रशिक्षण दे रहा है, वहां तैनात नगर निगम के कर्मचारी अंग्रेजी भाषा नहीं समझते हैं, जिसके कारण रोजमर्रा के संचालन और समन्वय में कठिनाई आती है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर कामकाज को सुचारू रखने के लिए हिंदी भाषा का ज्ञान आवश्यक होता है और इसी संदर्भ में उन्होंने बात रखी थी।
रेनू चौधरी ने यह दावा किया कि वीडियो को अधूरा और गलत संदर्भ में सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक विविधताओं से भरा शहर है, जहां हर व्यक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए और उनका किसी भी समुदाय या देश के नागरिक के प्रति कोई नकारात्मक भाव नहीं है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बीजेपी पार्षद के बयान की आलोचना की है और इसे विदेशियों के प्रति असहिष्णुता से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है और लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर काम करने वाले विदेशी नागरिकों के साथ संवाद और व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए, ताकि इस तरह के विवाद दोबारा न खड़े हों।



