Air India crash: एयर इंडिया क्रैश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – पायलट को दोष न दें, खुद पर बोझ मत रखिए
अहमदाबाद में जून महीने में हुई एयर इंडिया विमान दुर्घटना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीजीसीए से जवाब मांगा है। यह याचिका उस विमान के पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने हादसे की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान 91 वर्षीय पिता को संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पायलट पर किसी प्रकार का दोष नहीं है और उन्हें खुद को दोषी मानने की आवश्यकता नहीं है।
जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा, “आप अपने ऊपर बोझ मत रखिए। विमान हादसे के लिए पायलट को दोष नहीं दिया जा रहा है। यह एक दुखद दुर्घटना थी। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ कोई आरोप या संकेत नहीं है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल विमान के दो पायलटों के बीच हुई बातचीत का उल्लेख किया गया है, लेकिन कहीं यह नहीं कहा गया कि हादसा पायलट की गलती से हुआ।
पायलट के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसमें पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए गए थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि “यह रिपोर्टिंग केवल भारत को दोषी ठहराने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है।”
यह हादसा 12 जून को हुआ था जब अहमदाबाद हवाई अड्डे से लंदन जा रहा एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद मेघाणी नगर इलाके में स्थित एक मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर जा गिरा। दुर्घटना में विमान में सवार 242 यात्रियों में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा, जबकि बाकी सभी की मौत हो गई। इसके साथ ही, हादसे के दौरान जमीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए थे।
एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (AAIB) ने 12 जुलाई को जारी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि पायलट को किसी भी प्रकार से दोषी नहीं ठहराया गया है। रिपोर्ट के कुछ हिस्से सुप्रीम कोर्ट में पढ़े गए, जिनमें हादसे के संभावित तकनीकी कारणों का जिक्र था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को निर्धारित की है।
इससे पहले, पायलट के पिता और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि जांच सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की निगरानी में की जाए, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।