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Rampal Shastrarth Challenge: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल को दी खुले शास्त्रार्थ की चुनौती, शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि

Rampal Shastrarth Challenge: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल को दी खुले शास्त्रार्थ की चुनौती, शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि

रिपोर्ट: आशीष कुमार

वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में 18 अक्टूबर 2026 को आयोजित प्रेस वार्ता में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल द्वारा सनातन धर्म, वेद-शास्त्रों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर किए जा रहे कथित आपत्तिजनक प्रचार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक विषयों पर प्रस्तुत किए जा रहे तर्कों का जवाब शास्त्रों, प्रमाणों और युक्तियों के आधार पर दिया जाना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान रामपाल की शास्त्रार्थ चुनौती से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी गई और किसी तटस्थ स्थान पर आमने-सामने शास्त्रार्थ करने की खुली चुनौती भी रखी गई।

प्रेस वार्ता में रामपाल की पुस्तकों ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ में हिंदू देवी-देवताओं तथा धर्मशास्त्रों के संबंध में की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई। आयोजकों का आरोप है कि इन पुस्तकों में वेदों, पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के संदर्भों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जिससे लोगों में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति भ्रम और अनास्था पैदा हो सकती है। वक्ताओं ने हिंदू पर्वों, धार्मिक प्रतीकों, परंपराओं और वैदिक विवाह-संस्कार को लेकर रामपाल की ओर से प्रचारित विचारों की समीक्षा करने की आवश्यकता भी बताई। ये आरोप प्रेस वार्ता में आयोजकों की ओर से रखे गए; इन पर रामपाल का पक्ष अलग से सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

कार्यक्रम में रामपाल की शास्त्रार्थ चुनौती की प्रकृति और उसके पीछे प्रस्तुत किए गए तर्कों पर भी सवाल उठाए गए। आयोजकों ने कहा कि यदि धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या को लेकर मतभेद हैं, तो उनका समाधान सार्वजनिक बहस और प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने किसी तटस्थ स्थान पर आमने-सामने शास्त्रार्थ आयोजित करने की चुनौती दी। प्रेस वार्ता में जारी विज्ञप्ति में कुल 18 प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया, जिनमें धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या, हिंदू परंपराओं पर उठाए गए सवाल और शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल थे।

इस दौरान रामपाल की पुस्तकों के मुद्रण, मुद्रक के पते, प्रकाशन और वितरण व्यवस्था को लेकर भी प्रश्न उठाए गए। आयोजकों ने लखनऊ में हुई कानूनी कार्रवाई, दर्ज प्राथमिकी और न्यायालय में प्रस्तुत याचिकाओं से संबंधित घटनाक्रम का जिक्र किया। इन मामलों को लेकर उठाए गए सवालों और कानूनी प्रक्रिया के तथ्यों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी होगी।

प्रेस वार्ता की प्रमुख घोषणा में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शिवांश नारायण द्विवेदी को अपनी ओर से प्रतिनिधि नियुक्त करने की जानकारी दी। आयोजकों के अनुसार, शिवांश नारायण द्विवेदी सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों के संबंध में रामपाल की ओर से उठाए गए कथित आक्षेपों का शास्त्रीय आधार पर जवाब प्रस्तुत करेंगे। इस नियुक्ति को प्रस्तावित शास्त्रार्थ और धार्मिक विषयों पर होने वाली बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

कार्यक्रम में शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित पुस्तक ‘रामपाल का रसातल गमन’ का विमोचन भी किया गया। आयोजकों के मुताबिक, इस ग्रंथ में सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों पर रामपाल की ओर से लगाए गए विभिन्न आक्षेपों का शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर निराकरण करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में प्रामाणिक आचार्यों के विचारों और धार्मिक ग्रंथों से संबंधित तर्कों को संकलित करने की बात कही गई। आयोजकों ने इसे धार्मिक विषयों पर चल रही बहस में अपना पक्ष रखने का माध्यम बताया।

प्रेस वार्ता के अंत में जागरूक सनातनियों, धर्माचार्यों, विद्वानों और पत्रकारों से अपील की गई कि वे कार्यक्रम में उठाए गए प्रश्नों और शास्त्रीय विषयों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। आयोजकों ने दोहराया कि धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों से जुड़े विवादों का समाधान व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय शास्त्र, प्रमाण और तर्क के आधार पर होना चाहिए। अब इस चुनौती पर रामपाल की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित शास्त्रार्थ को लेकर आगे होने वाली गतिविधियों पर नजर रहेगी।

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