BMC Election Results: बीएमसी चुनाव परिणामों में बड़ा उलटफेर, 28 साल बाद उद्धव ठाकरे के किले पर संकट, मुंबई को मिल सकता है भाजपा मेयर
मुंबई में बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। 28 साल से बीएमसी पर काबिज उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए यह चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होता दिख रहा है। शुरुआती और रुझानों के अनुसार बीएमसी समेत राज्य की 20 से ज्यादा नगरपालिकाओं में भाजपा की मजबूत पकड़ नजर आ रही है, जिससे मुंबई को नया मेयर मिलने की संभावना बन गई है। बीएमसी चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह संकेत साफ होते जा रहे हैं कि शिवसेना का पारंपरिक गढ़ अब ढहने की कगार पर है।
गौरतलब है कि बीएमसी सहित महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में गुरुवार को मतदान हुआ था। इन चुनावों को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बीएमसी में करीब 9 साल बाद चुनाव कराए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक 2026 के इन चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी ने 2017 के मतदान रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। राज्यभर में कुल 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए वोटिंग हुई, जिसमें 15,931 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला 3.48 करोड़ मतदाताओं ने किया।
चुनावी नतीजों में जहां भाजपा की लहर कई नगरपालिकाओं में दिख रही है, वहीं कांग्रेस लातूर और चंद्रपुर में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। बीएमसी में भाजपा के बढ़ते प्रदर्शन ने शिवसेना नेतृत्व के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पार्टी 1997 से लगातार मुंबई की सत्ता पर काबिज रही है। यदि मौजूदा रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में कई अहम घटनाक्रम देखने को मिले थे। मराठी वोटों को एकजुट करने के प्रयास में करीब दो दशक पहले अलग हुए चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक बार फिर साथ आए थे। इसके अलावा पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच गठबंधन भी चर्चा का विषय रहा। हालांकि इन राजनीतिक प्रयासों के बावजूद बीएमसी में शिवसेना की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
अब सभी की निगाहें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो शाम पांच बजे तक जारी होने की संभावना है। यदि भाजपा बीएमसी में बहुमत या सबसे बड़ी पार्टी बनती है, तो मुंबई को पहली बार भाजपा का मेयर मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। यह न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत मानी जाएगी।