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ED Action : 155 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में AAP नेता दीपक सिंगला गिरफ्तार, दिल्ली-गोवा समेत 7 ठिकानों पर छापेमारी

ED Action News: 155 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में AAP नेता दीपक सिंगला गिरफ्तार, दिल्ली-गोवा समेत 7 ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी के नेता दीपक सिंगला को 155 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर बड़ा एक्शन लिया है। यह कार्रवाई महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड केस में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार इस वित्तीय घोटाले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले के तार पहले से गिरफ्तार पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सबूत जुटाने और पूरे नेटवर्क की जांच के लिए ED ने सोमवार सुबह दिल्ली और गोवा समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी ने दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरिक गिल और अन्य लोगों से जुड़े कुल 7 ठिकानों पर रेड की। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत बरामद किए गए। ED का दावा है कि शुरुआती जांच में वित्तीय हेरफेर और बैंक धोखाधड़ी के पुख्ता संकेत मिले हैं, जिसके आधार पर दीपक सिंगला को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया।

ED अधिकारियों के अनुसार महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों से धोखाधड़ी कर करीब 155 करोड़ रुपये की राशि हासिल की और बाद में पैसों का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

सूत्रों का कहना है कि दीपक सिंगला की भूमिका इस पूरे मामले में सीधे तौर पर सामने आई है। इसके अलावा महेश सिंगला और अमरिक गिल के नाम भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी मनी ट्रेल खंगाल रही है और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जांच की जा रही है।

इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी जल्द ही गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड की मांग कर सकती है ताकि पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क और पैसों के प्रवाह का पता लगाया जा सके।

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