Indore Water Contamination Death: इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का संकट, 8 मौतों का दावा, 2 अफसर सस्पेंड, एक बर्खास्त

Indore Water Contamination Death: इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का संकट, 8 मौतों का दावा, 2 अफसर सस्पेंड, एक बर्खास्त

देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर में इस समय एक गंभीर जल संकट ने प्रशासन और जनता दोनों को झकझोर कर रख दिया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित और कथित रूप से जहरीला पानी पीने से कई लोगों की मौत का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक आठ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में फिलहाल तीन मौतों की ही पुष्टि की गई है। इस आंकड़ों के अंतर को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में पिछले कुछ दिनों से सप्लाई हो रहा पानी पीने के बाद लोगों को उल्टी, दस्त और तेज बुखार जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं। कई लोग अचानक बीमार पड़े और हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान एक हफ्ते के भीतर छह महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। इलाके में इस घटना के बाद भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

वहीं, प्रशासन की ओर से मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग बयान सामने आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब तक तीन मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जबकि बुधवार को इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सात मौतों को स्वीकार किया था। इस विरोधाभास ने मामले को और गंभीर बना दिया है और लोगों के बीच प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता नजर आ रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और भागीरथपुरा क्षेत्र में तैनात एक असिस्टेंट इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि एक इंचार्ज सब-इंजीनियर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद भी स्थानीय लोग दोषियों पर और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता एक वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी कर रहे हैं। यह समिति दूषित पानी से मौतों के आरोपों, लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने का काम करेगी। नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि जांच के दौरान भागीरथपुरा इलाके में मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में एक स्थान पर लीकेज पाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस पाइपलाइन के ऊपर एक शौचालय बना हुआ है, जिससे पानी के दूषित होने की आशंका और भी गहरी हो गई है।

नगर आयुक्त के अनुसार, इसी लीकेज के कारण सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया होगा, जिससे यह गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हुआ। फिलहाल प्रभावित इलाके में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत टैंकरों से साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बीमार लोगों की जांच कर रही हैं।

इस पूरे मामले ने इंदौर की स्वच्छता की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता, तो इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था। अब लोग प्रशासन से पारदर्शी जांच, सटीक आंकड़े और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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