Oracle Layoffs: ऑटोनोमस डेटाबेस बना बड़ी छंटनी की वजह, हजारों भारतीय कर्मचारियों पर असर
अमेरिकी टेक दिग्गज Oracle में हो रही बड़ी छंटनी ने वैश्विक टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने करीब 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई है, जिसमें अकेले भारत से लगभग 12 हजार कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। यह कदम ईमेल के जरिए अचानक सामने आने से कर्मचारियों के बीच चिंता और अनिश्चितता बढ़ गई है।
कंपनी के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण टेक्नोलॉजी में तेजी से हो रहा बदलाव माना जा रहा है, जहां अब कंपनियां पारंपरिक मानव संसाधन पर निर्भरता कम करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं। Oracle भी अब खुद को एक पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनी से बदलकर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख कंपनी के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस बदलाव का केंद्र है कंपनी का Oracle Autonomous Database, जो डेटा मैनेजमेंट को पूरी तरह ऑटोमेट कर देता है। यह सिस्टम खुद ही अपडेट, सिक्योरिटी और परफॉर्मेंस मैनेजमेंट का काम करता है, जिससे मानव हस्तक्षेप की जरूरत काफी कम हो जाती है।
पहले जहां बड़े डेटाबेस सिस्टम को संभालने के लिए पूरी टीम की जरूरत होती थी, वहीं अब वही काम कुछ लोग और AI सिस्टम मिलकर कर सकते हैं। इससे कंपनियों के लिए ऑपरेशनल खर्च काफी कम हो जाता है, लेकिन इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ रहा है।
Oracle बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही है, जहां महंगे GPU चिप्स, बिजली और कूलिंग सिस्टम पर भारी खर्च आता है। ऐसे में कंपनी अपने खर्च को संतुलित करने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही है और संसाधनों को AI तकनीक पर शिफ्ट कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ Oracle का नहीं, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री का नया ट्रेंड है, जहां कंपनियां तेजी से ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में कई पारंपरिक आईटी नौकरियों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि वही काम अब मशीनें और AI सिस्टम तेजी से और कम लागत में कर पा रहे हैं।
इस बदलाव ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या टेक इंडस्ट्री में इंसानों की भूमिका धीरे-धीरे सीमित होती जा रही है, या फिर यह केवल स्किल-अपग्रेड और नई तकनीक के साथ तालमेल का दौर है।