Shankaracharya Controversy Prayagraj: अविमुक्तेश्वरानंद की जान को खतरे का दावा, शिविर में लगाए गए 12 CCTV कैमरे

Shankaracharya Controversy Prayagraj: अविमुक्तेश्वरानंद की जान को खतरे का दावा, शिविर में लगाए गए 12 CCTV कैमरे

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच पिछले छह दिनों से चला आ रहा विवाद अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। शिष्यों का दावा है कि अविमुक्तेश्वरानंद की जान को खतरा हो सकता है, इसी आशंका के चलते उनके शिविर के अंदर और बाहर कुल 12 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। शिष्यों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

इसी बीच अविमुक्तेश्वरानंद की सेहत भी चिंता का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि उनकी तबीयत अभी पूरी तरह ठीक नहीं है। शुक्रवार रात उन्होंने दवा ली थी, जबकि इससे पहले शुक्रवार को उनकी हालत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तेज बुखार की शिकायत हुई थी, जिसके बाद शिष्यों और समर्थकों में चिंता और बढ़ गई। इसके बावजूद अविमुक्तेश्वरानंद अपने रुख पर कायम हैं और शिविर में ही डटे हुए हैं।

शंकराचार्य विवाद पर अब सियासत भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि अविमुक्तेश्वरानंद मजबूती से डटे हुए हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि एक-एक सनातनी उनके साथ खड़ा है और उन्होंने कम से कम नकली सनातनियों की पोल खोल दी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका अविमुक्तेश्वरानंद से सीधा संपर्क बना हुआ है और वे लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

इससे पहले अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ करते हुए उन्हें समझदार नेता बताया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री वही होना चाहिए जो यह समझ सके कि अफसरों से गलती हुई है। जो व्यक्ति अकड़ में बैठा हो, वह मुख्यमंत्री बनने के योग्य नहीं है। उनके इस बयान को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में स्नान को लेकर शुरू हुआ था। जनवरी में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। इस पर शिष्यों ने विरोध किया, जिसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। इस घटना से नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे और तब से मामला तूल पकड़ता चला गया।

विवाद के बाद मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके द्वारा शंकराचार्य की पदवी के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे पर जवाब मांगा गया। प्रशासन ने यहां तक चेतावनी दी थी कि क्यों न उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। हालांकि, अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का लिखित जवाब भेज दिया है।

फिलहाल प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का मामला लगातार गरमाया हुआ है। एक ओर सुरक्षा को लेकर शिष्यों की चिंता बढ़ रही है, तो दूसरी ओर प्रशासन और संत समाज के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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