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Modi-Xi Meeting: BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय बैठक, भारत-चीन संबंधों पर हुई चर्चा

Modi-Xi Meeting: BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय बैठक, भारत-चीन संबंधों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit-2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर और बेहतर बनाने, आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने तथा लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए संभालने पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक की शुरुआत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। BRICS Summit के दौरान हुई इस मुलाकात पर दोनों देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर रही।

शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की यात्रा पर आए हैं। इससे पहले वह 2019 में भारत आए थे, जब तमिलनाडु के मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी अनौपचारिक शिखर बैठक हुई थी। इसके बाद भारत और चीन के रिश्तों में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले।

विशेष रूप से 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव और गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। इस घटना के बाद सीमा पर लंबे समय तक तनाव बना रहा और दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की।

भारत और चीन के बीच इसके बाद सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों के बीच टकराव की स्थिति को रोकने के लिए लगातार संवाद जारी रखा।

पिछले कुछ वर्षों में सीमा के कुछ विवादित क्षेत्रों में डिसएंगेजमेंट की दिशा में प्रगति हुई है। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं। हालांकि व्यापक सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

ऐसे में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत को सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दोनों देशों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि सीमा पर शांति और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंध भी दोनों नेताओं की बातचीत के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। राजनीतिक और सीमा संबंधी तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच बड़े स्तर पर व्यापार जारी रहा है।

चीन भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन लंबे समय से भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। भारत बाजार तक बेहतर पहुंच और व्यापारिक संतुलन जैसे मुद्दों को भी उठाता रहा है।

पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन और संपर्क को सामान्य बनाने की दिशा में भी प्रयास हुए हैं। वीजा, सीधी उड़ानों और अन्य संपर्क व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को इसी बदलते माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय बाद चीन के शीर्ष नेता की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को एक नया अवसर दिया है।

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुपक्षीय कार्यक्रमों में भी एक साथ नजर आए। सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच मुलाकात और बातचीत ने खास ध्यान आकर्षित किया।

प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS देशों के नेताओं ने सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

भारत 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण नई दिल्ली वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

भारत और चीन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों का प्रभाव केवल एशिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और रणनीतिक संतुलन पर भी पड़ता है।

दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के अलावा व्यापार, निवेश, तकनीक और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। कई विषयों पर मतभेद होने के बावजूद भारत और चीन ने उच्चस्तरीय संवाद को जारी रखने की कोशिश की है।

2020 के सीमा तनाव के बाद भारत ने चीन से जुड़े निवेश और तकनीकी गतिविधियों को लेकर कई सख्त कदम उठाए थे। कई चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया और चीनी निवेश की जांच व्यवस्था को भी कड़ा किया गया था।

इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बड़े स्तर पर जारी रहे। हाल के वर्षों में राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को स्थिर करने की कोशिश भी तेज हुई है।

नई दिल्ली में हुई मोदी-शी बैठक इसी प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत से जटिल मुद्दों को संभालने और आगे के संवाद की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।

BRICS के भीतर भी भारत और चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देश संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं और ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को मजबूत करने की बात करते रहे हैं।

वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों के हितों, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था जैसे विषयों पर BRICS एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।

नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

ऐसे वैश्विक माहौल में भारत और चीन के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को विशेष महत्व दिया जा रहा है। दोनों देशों के बीच स्थिर संबंध एशिया और व्यापक वैश्विक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

हालांकि भारत और चीन के बीच सभी मतभेद समाप्त नहीं हुए हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े कई मुद्दे, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक चिंताएं अभी भी दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।

इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई दिल्ली में हुई आमने-सामने की बातचीत से यह संकेत मिला है कि दोनों पक्ष मतभेदों को बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से संभालने की प्रक्रिया जारी रखना चाहते हैं।

करीब सात साल बाद शी जिनपिंग की भारत यात्रा और BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उच्चस्तरीय बातचीत के बाद सीमा, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच आगे क्या प्रगति होती है।

 

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