
Punjab Drug Crisis: ‘पिज्जा-कोका-कोला से भी जल्दी घर पहुंच रहा चिट्टा’, सचिन पायलट ने AAP और BJP को घेरा
पंजाब में नशे की समस्या और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्य सरकार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में चिट्टा जैसे नशीले पदार्थों की उपलब्धता इतनी बढ़ गई है कि एक फोन कॉल पर इसकी डिलीवरी पिज्जा और कोका-कोला से भी जल्दी हो जाती है। पायलट ने राज्य में नशीले पदार्थों की सप्लाई, गैंगस्टरों की गतिविधियों और पुलिस थानों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहा है और इस पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
पंजाब के प्रभारी कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने पीटीआई वीडियो को दिए इंटरव्यू में कहा कि राज्य में चिट्टे की सप्लाई लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। पायलट ने कहा कि लोग बताते हैं कि पिज्जा या कोल्ड ड्रिंक मंगाने पर आधा घंटा से 40 मिनट तक लग जाते हैं, लेकिन चिट्टा फोन करने पर उससे भी जल्दी घर पहुंच जाता है। यह टिप्पणी करते हुए उन्होंने राज्य में नशे के नेटवर्क की पहुंच और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पायलट ने नशीले पदार्थों की सीमा पार से होने वाली कथित सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से पंजाब में रासायनिक नशीले पदार्थ पहुंच रहे हैं और इसके बाद इन्हें गांवों तथा मोहल्लों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर करीब 21,000 करोड़ रुपये मूल्य की कोकीन जब्त किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की बरामदगी नशे के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गंभीरता को दर्शाती है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सीमा पर पहुंचने के बाद नशीले पदार्थों का गांवों और शहरों के मोहल्लों तक वितरण किसी संगठित नेटवर्क के बिना संभव नहीं है। उन्होंने पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर कथित मिलीभगत की आशंका जताई। हालांकि, यह पायलट के आरोप हैं और किसी विशेष अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सप्लाई चेन, तस्करी के रास्तों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क की जांच जरूरी है।
सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली AAP सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने का वादा किया था, लेकिन उनके मुताबिक स्थिति में सुधार होने के बजाय समस्या और गंभीर हुई है। पायलट ने युवाओं में बढ़ती नशे की लत, नशामुक्ति केंद्रों की प्रभावशीलता और नशे के कारण परिवारों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं और विज्ञापनों से नशे की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। वहीं, पंजाब सरकार विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज करती रही है।
पायलट ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में पुलिस थानों और पुलिस चौकियों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमले किए जाने तथा पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने अप्रैल 2022 से नवंबर 2025 के बीच गैंगस्टरों के साथ 324 पुलिस मुठभेड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक, सितंबर 2024 के बाद से पंजाब में 30 से अधिक ग्रेनेड हमलों और धमाकों की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई घटनाएं पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर की गईं। ये आंकड़े पायलट की ओर से दिए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने राज्य में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 के अंत तक पंजाब में 400 से अधिक गैंग मॉड्यूल सक्रिय थे और विदेश में बैठे करीब 40 गैंगस्टर राज्य में हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे थे। पायलट ने तरनतारन में दो AAP सरपंचों की अलग-अलग शादी समारोहों के दौरान हुई हत्याओं और जालंधर में AAP नेता लकी ओबेरॉय की हत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन घटनाओं को राज्य में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चुनौती बताते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
पायलट के मुताबिक, नशे के कारोबार और गैंगस्टर गतिविधियों के बीच संबंधों की जांच करना जरूरी है, क्योंकि अवैध कमाई से आपराधिक नेटवर्क को आर्थिक मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रदर्शन का आकलन राजनीतिक दावों के बजाय अपराध, नशे की सप्लाई और सुरक्षा से जुड़े तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं। फिलहाल AAP सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज करती है, जबकि कांग्रेस राज्य में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेर रही है।



