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World Suicide Prevention Day: आत्महत्या पर रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जरूरी, मीडिया संगठनों से सुरक्षित पत्रकारिता की अपील

World Suicide Prevention Day: आत्महत्या पर रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जरूरी, मीडिया संगठनों से सुरक्षित पत्रकारिता की अपील

नई दिल्ली। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितंबर 2026 के अवसर पर मीडिया संगठनों से आत्महत्या से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय सटीक, संवेदनशील और जिम्मेदार पत्रकारिता अपनाने की अपील की गई है। इस वर्ष की थीम “Changing the Narrative on Suicide” यानी आत्महत्या को लेकर समाज में बनी धारणा और संवाद को बदलने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य कलंक, चुप्पी और गलत धारणाओं की जगह समझ, उम्मीद और समय पर मदद लेने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

आत्महत्या को केवल किसी एक घटना या व्यक्तिगत परिस्थिति के परिणाम के रूप में पेश करने के बजाय एक जटिल और रोकथाम योग्य सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समझने की जरूरत पर जोर दिया गया है। मीडिया की भाषा और खबर प्रस्तुत करने का तरीका प्रभावित व्यक्ति, उसके परिवार और मानसिक संकट से गुजर रहे दूसरे लोगों पर भी असर डाल सकता है। इसी कारण रिपोर्टिंग में शब्दों के चयन से लेकर तस्वीरों और व्यक्तिगत जानकारियों के इस्तेमाल तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मीडिया संगठनों से कहा गया है कि आत्महत्या से संबंधित खबरों में सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाए। अंग्रेजी रिपोर्टिंग में “died by suicide” और “attempted suicide” जैसे शब्दों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। साथ ही ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों से बचने को कहा गया है, जो आत्महत्या को अपराध, उपलब्धि या सफलता-असफलता के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।

रिपोर्टिंग के दौरान संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार की निजता तथा गरिमा की रक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई गई है। निजी तस्वीरें, वीडियो या सोशल मीडिया से प्राप्त व्यक्तिगत सामग्री केवल सनसनी पैदा करने के लिए इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए। किसी परिवार के दुख और निजी परिस्थितियों को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक करने से भी बचने की सलाह दी गई है।

आत्महत्या की घटना से संबंधित तरीके, विशिष्ट स्थान या कथित सुसाइड नोट का विस्तृत वर्णन या प्रदर्शन नहीं करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी तरह खबर के शीर्षक को सनसनीखेज बनाने या घटना को बार-बार अत्यधिक प्रमुखता देने से बचने की अपील की गई है।

मीडिया से यह भी कहा गया है कि किसी आत्महत्या को परीक्षा के परिणाम, रिश्ते में परेशानी, आर्थिक समस्या, नौकरी या किसी एक घटना से सीधे जोड़कर प्रस्तुत न किया जाए। आत्महत्या के पीछे कई परस्पर जुड़े मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और अन्य कारक हो सकते हैं। इसलिए किसी एक कारण को निर्णायक रूप में प्रस्तुत करना जटिल परिस्थितियों का अत्यधिक सरलीकरण हो सकता है।

जिम्मेदार रिपोर्टिंग में केवल घटना की जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं माना गया है। खबरों में मानसिक और भावनात्मक संकट के संभावित चेतावनी संकेतों, उपलब्ध उपचार और सहायता सेवाओं के बारे में उपयोगी जानकारी शामिल करने की सलाह दी गई है, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति या उसके आसपास के लोग समय रहते मदद तक पहुंच सकें।

इसके साथ ही मानसिक संकट से उबरने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और सफलतापूर्वक पेशेवर सहायता लेने से जुड़ी सकारात्मक कहानियों को भी जगह देने पर जोर दिया गया है। ऐसी रिपोर्टिंग लोगों को यह संदेश दे सकती है कि गंभीर भावनात्मक संकट के दौरान भी सहायता उपलब्ध है और मदद मांगना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट तैयार करते समय योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय लेने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों की जानकारी से जटिल मानसिक स्वास्थ्य विषयों को अधिक सटीक तरीके से समझाने और भ्रामक धारणाओं से बचने में मदद मिल सकती है।

मीडिया संगठनों से आत्महत्या को रोमांटिक या महिमामंडित नहीं करने और किसी समस्या के समाधान के रूप में प्रस्तुत नहीं करने की अपील की गई है। खबर की भाषा ऐसी होनी चाहिए जिससे संकट में मौजूद व्यक्ति को निराशा के बजाय सहायता और उम्मीद की दिशा दिखाई दे।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का संदेश इस बात पर केंद्रित है कि आत्महत्या से जुड़े सामाजिक कलंक और चुप्पी को कम करने के लिए बातचीत का तरीका बदलना जरूरी है। परिवार, समुदाय, स्वास्थ्य सेवाओं और मीडिया की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण हो सकती है। संवेदनशील संवाद लोगों को अपनी परेशानी साझा करने और समय पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

गंभीर भावनात्मक संकट या आत्महत्या के विचारों का सामना कर रहे व्यक्ति के लिए तत्काल सहायता उपलब्ध है। भारत में Tele-MANAS की हेल्पलाइन 14416 या 1-800-891-4416 पर संपर्क किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भी मदद ली जा सकती है। आपात स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है। तत्काल जोखिम में मौजूद व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर मीडिया के लिए संदेश स्पष्ट है कि जिम्मेदार पत्रकारिता केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आत्महत्या की रोकथाम के व्यापक प्रयासों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सटीक भाषा, निजता का सम्मान, सनसनी से दूरी और सहायता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराकर मीडिया लोगों को समय पर मदद लेने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

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