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Gaurav Bhatia Defamation Case: सौरव दास समेत तीन CJP नेताओं पर 2 करोड़ की मानहानि का मुकदमा, दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई

Gaurav Bhatia Defamation Case: सौरव दास समेत तीन CJP नेताओं पर 2 करोड़ की मानहानि का मुकदमा, दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वकील और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास समेत तीन नेताओं के खिलाफ दो करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस मामले में सौरव दास के अलावा अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका को भी पक्ष बनाया गया है। भाटिया की ओर से दायर इस मानहानि मामले पर बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है।

यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक कथित फर्जी ग्राफिक से शुरू हुआ। गौरव भाटिया का आरोप है कि सौरव दास ने एक ऐसी तस्वीर शेयर की, जिसमें उनके नाम और फोटो के साथ हिंदूवादी इंफ्लूएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर एक बयान दिखाया गया था। भाटिया ने इस कथित बयान को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

भाटिया ने अपने मुकदमे में आरोप लगाया है कि CJP से जुड़े नेताओं ने AI-जनरेटेड कथित फर्जी ग्राफिक को शेयर किया और सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। उनका कहना है कि इस ग्राफिक के जरिए उनके नाम से ऐसा बयान जोड़ा गया, जो उन्होंने नहीं दिया था।

विवादित ग्राफिक में एक मीडिया संस्थान का नाम दिखाई दे रहा था और उसके नीचे गौरव भाटिया के हवाले से स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर टिप्पणी लिखी गई थी। कथित बयान में स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सली’ और ‘जातिवादी’ बताए जाने का दावा किया गया था। इसके नीचे गौरव भाटिया का नाम, भाजपा नेता का परिचय और उनकी तस्वीर भी लगाई गई थी।

सौरव दास ने इसी ग्राफिक को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘नो कमेंट्स अगेन’ लिखते हुए शेयर किया था। पोस्ट सामने आने के बाद गौरव भाटिया ने तुरंत इसका विरोध किया और सार्वजनिक रूप से इसे फर्जी बताया।

भाटिया ने सौरव दास की पोस्ट को शेयर करते हुए उन्हें 24 घंटे का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि कथित फर्जी पोस्ट को हटाकर बिना शर्त माफी मांगी जाए। इसके साथ ही उन्होंने ऐसा नहीं किए जाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

चेतावनी मिलने के बाद सौरव दास ने विवादित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी। हालांकि गौरव भाटिया के मुताबिक पोस्ट हटाए जाने के बावजूद उनकी मांग के अनुसार बिना शर्त माफी नहीं मांगी गई।

इसके बाद भाटिया ने एक और पोस्ट करते हुए कहा था कि विवादित सामग्री को हटने में केवल 83 मिनट लगे, लेकिन बिना शर्त माफी अब भी नहीं आई है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि माफी नहीं मांगने की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराने समेत कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

भाटिया का कहना था कि सोशल मीडिया पर कथित प्रोपेगैंडा फैलाने के बाद केवल पोस्ट डिलीट कर देने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। इसी विवाद के आगे बढ़ने के बाद अब उन्होंने सौरव दास समेत तीन लोगों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

भाटिया ने मानहानि के मुकदमे में दो करोड़ रुपये का दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कथित फर्जी सामग्री को उनके नाम से जोड़कर प्रसारित करने से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

मामले में सौरव दास के अलावा अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका को भी शामिल किया गया है। भाटिया ने आरोप लगाया है कि कथित AI-जनरेटेड ग्राफिक को शेयर करने और उसके प्रसार में CJP से जुड़े इन नेताओं की भूमिका रही है। हालांकि इन आरोपों की कानूनी सत्यता पर अब अदालत में सुनवाई होगी।

गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया के जरिए मुकदमा दायर किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘जब आरोप अपनी सीमा लांघते हैं, तब कानून अपनी लकीर खींचता है।’ इसके साथ उन्होंने दो करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किए जाने की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मानहानि का मामला दिल्ली हाई कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। भाटिया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस विवाद को सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई के बजाय अदालत में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाना चाहते हैं।

अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो सोशल मीडिया ट्रायल होना चाहिए और न ही बयानों की जंग। उन्होंने तथ्य, सबूत और कानून के शासन की बात करते हुए कहा कि सच की परीक्षा अदालत में होनी चाहिए।

इसके बाद साझा की गई एक अन्य पोस्ट में भाटिया ने लिखा कि अदालत में ठोस दलीलें रखी जाएंगी। उनके सोशल मीडिया बयानों से स्पष्ट है कि वह इस मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।

विवाद की शुरुआत जिस पोस्ट से हुई, उसमें गौरव भाटिया के नाम से स्वतंत्र भारद्वाज के बारे में एक टिप्पणी दिखाई गई थी। भाटिया ने स्पष्ट रूप से दावा किया है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया और उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी सामग्री तैयार की गई।

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित तौर पर AI की मदद से तैयार किए गए ग्राफिक का इस्तेमाल भी है। भाटिया ने अपने केस में इसे AI-जनरेटेड फर्जी ग्राफिक बताते हुए आरोप लगाया है कि इसे वास्तविक मीडिया सामग्री की तरह पेश कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।

अब दिल्ली हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान भाटिया की ओर से लगाए गए आरोपों, कथित ग्राफिक, सोशल मीडिया पोस्ट और उससे संबंधित साक्ष्यों पर कानूनी बहस होने की संभावना है। दूसरी ओर प्रतिवादी पक्ष को भी अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

फिलहाल दो करोड़ रुपये का यह मानहानि दावा गौरव भाटिया की ओर से लगाया गया आरोप है और मामले में अंतिम निर्णय अदालत को करना है। सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही कथित मानहानि और संबंधित पक्षों की कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।

 

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