राजनीति

Political Row: ‘दिमागी नक्सल कहलाने पर मुझे खुशी और गर्व’, पीएम मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले तंज पर पी. चिदंबरम का पलटवार

Political Row: ‘दिमागी नक्सल कहलाने पर मुझे खुशी और गर्व’, पीएम मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले तंज पर पी. चिदंबरम का पलटवार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल के भाषणों में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि वह ‘बेवकूफ नक्सल’ नहीं, बल्कि ‘दिमागी नक्सल’ हैं। उन्होंने ‘नाराज फूफा’ जैसी टिप्पणियों को भी बेमतलब बताते हुए प्रधानमंत्री की ओर से लगातार नए नारे और शब्द गढ़े जाने पर सवाल उठाया।

पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने से परेशान नहीं हैं, बल्कि इसे गर्व की बात मानते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कम से कम उन्हें ‘बेवकूफ नक्सल’ नहीं कहा गया। चिदंबरम इससे पहले सोशल मीडिया पर भी खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने को लेकर प्रतिक्रिया दे चुके हैं।

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों में इस्तेमाल होने वाले नारों और नई राजनीतिक अभिव्यक्तियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘स्वघोषित कवि’ बताते हुए कहा कि मोदी गुजराती में कविताएं लिखते हैं और संभवतः इसी तरह नए शब्द और अभिव्यक्तियां गढ़ते हैं, जिनका बाद में अंग्रेजी में अनुवाद होता है। चिदंबरम के मुताबिक यह प्रधानमंत्री का अपना तरीका है, लेकिन ऐसे शब्दों का राजनीतिक बहस में कोई खास अर्थ नहीं है।

चिदंबरम ने दावा किया कि पिछले करीब 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 20 से 25 नारे और अभिव्यक्तियां दी हैं। उन्होंने ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इस सूची में ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे नए शब्द भी शामिल हो गए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री कोई और नया शब्द या नारा दे सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार इन शब्दों का कोई ठोस अर्थ नहीं निकलता।

इस राजनीतिक जुबानी जंग में सोशल मीडिया और Gen Z का भी जिक्र हुआ। चिदंबरम ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि ‘नाराज फूफा’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों को लेकर Gen Z के सोशल मीडिया यूजर्स बड़ी संख्या में मीम बना रहे हैं। उन्होंने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ‘दिमागी नक्सल’ वाली उनकी प्रतिक्रिया को बड़ी संख्या में लोगों ने पसंद किया। चिदंबरम ने इसे भी व्यंग्यात्मक तरीके से प्रधानमंत्री की टिप्पणी के जवाब के रूप में पेश किया।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर विवाद प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद चर्चा में आया था। प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने भाषण में लोगों और संस्थाओं से ऐसी वैचारिक सोच रखने वालों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही थी। मोदी ने कहा था कि हथियारबंद माओवादी हिंसा के खिलाफ सरकार की कार्रवाई से बड़ी सफलता मिली है, लेकिन वैचारिक स्तर पर ऐसी मानसिकता की चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आरोप लगाया था कि माओवादी मानसिकता वाले लोग पहले सरकारी समितियों और नीति निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी प्रभाव रखते थे। उन्होंने युवाओं को ऐसी विचारधारा से प्रभावित होने से बचाने की जरूरत पर जोर दिया था। इसके बाद चिदंबरम ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व होने की बात कही थी।

वहीं, ‘नाराज फूफा’ शब्द प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की परियोजनाओं की लगातार आलोचना करने वालों पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल किया है। मंगलवार को वडोदरा में आयोजित ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने Dedicated Freight Corridor की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए एक बार फिर इस शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि JNPT से वडोदरा तक डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी के जरिए एक बार में इतना सामान पहुंचाया गया, जिसके परिवहन के लिए सड़क मार्ग से 250 से अधिक ट्रकों की आवश्यकता पड़ सकती थी।

इसी उदाहरण के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने आलोचकों पर तंज किया। उनका कहना था कि ऐसी उपलब्धि सामने आने पर भी कुछ लोग सवाल करेंगे कि ट्रक चालकों और ट्रक खरीदने वालों का क्या होगा। मोदी ने ऐसे आलोचकों के लिए ‘नाराज फूफा’ की उपमा इस्तेमाल की। प्रधानमंत्री का तर्क था कि बड़े बदलाव और विकास परियोजनाओं के सामने आने पर कुछ लोग उनके लाभ देखने के बजाय उनमें कमियां तलाशने लगते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में भी ‘नाराज फूफा’ जैसी अभिव्यक्ति का इस्तेमाल कर चुके हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, हाई-स्पीड ट्रेन और UPI जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए कहा था कि नई परियोजनाओं की शुरुआत के समय कुछ लोग लगातार उनकी आवश्यकता पर सवाल उठाते रहे। प्रधानमंत्री ने ऐसे आलोचकों को इसी उपमा के जरिए निशाने पर लिया था।

प्रधानमंत्री की इन्हीं टिप्पणियों पर चिदंबरम ने अब तीखा जवाब दिया है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों और फैसलों की आलोचना को इस तरह की राजनीतिक उपमाओं से जोड़ने के बजाय वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से लगातार इस्तेमाल किए जा रहे नए नारों और शब्दों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर युवा भी अब इन अभिव्यक्तियों को मीम्स में बदल रहे हैं।

‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ को लेकर शुरू हुई यह बयानबाजी अब भाजपा और कांग्रेस के बीच नई राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी इन शब्दों के जरिए वैचारिक विरोधियों और सरकारी योजनाओं के आलोचकों पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता चिदंबरम ने इन्हीं शब्दों को अपने अंदाज में स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री पर पलटवार किया है। सोशल मीडिया पर भी दोनों अभिव्यक्तियों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ मीम्स और टिप्पणियों का दौर जारी है।

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