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JPSC Scam: जेपीएससी मेधा घोटाले में CID की बड़ी कार्रवाई, तीन दलाल गिरफ्तार, अब तक 14 आरोपी दबोचे गए

JPSC Scam: जेपीएससी मेधा घोटाले में CID की बड़ी कार्रवाई, तीन दलाल गिरफ्तार, अब तक 14 आरोपी दबोचे गए

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) को बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार देर रात सीआईडी ने तीन कथित दलालों (सोर्स एजेंट) को गिरफ्तार किया है, जो अभ्यर्थियों से संपर्क कर परीक्षा में सेटिंग कराने के नाम पर पैसे वसूलते थे और उन्हें परीक्षा संचालन से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचाते थे। इस कार्रवाई के साथ ही जेपीएससी मेधा घोटाले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, ये तीनों लंबे समय से अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके दस्तावेज एकत्र करते थे, उनसे मोटी रकम वसूलते थे और फिर अपने नेटवर्क के माध्यम से परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) तक पहुंचाते थे।

सीआईडी की जांच में सामने आया है कि इन दलालों के टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी से करीबी संबंध थे। पहले से गिरफ्तार आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ के दौरान ही इन तीनों एजेंटों की भूमिका का खुलासा हुआ। इसके बाद सीआईडी ने तकनीकी जांच और इंटर-स्टेट लिंकेज के आधार पर इन्हें रांची से गिरफ्तार कर लिया।

सीआईडी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। इनमें अभ्यर्थियों की परीक्षा में सेटिंग कराने, चयन सुनिश्चित करने और पैसों के लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि बरामद डिजिटल रिकॉर्ड से पूरे रैकेट के संचालन और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का भी खुलासा होने की संभावना है।

छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से जेपीएससी परीक्षाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। इनमें अभ्यर्थियों की मार्कशीट, ओएमआर शीट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र तथा अन्य गोपनीय दस्तावेज शामिल हैं। सीआईडी इन सभी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही है, ताकि घोटाले के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

गौरतलब है कि इस मामले में सीआईडी ने 22 जुलाई 2026 को सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हुईं। जांच एजेंसी का दावा है कि हर नई गिरफ्तारी के साथ घोटाले से जुड़े नए तथ्य और साक्ष्य सामने आ रहे हैं।

इस मामले में इससे पहले जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान और एबाद, कर्मचारी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार, मुख्य आरोपी के सहयोगी अरविंद कुमार तथा 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सीआईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस पूरे रैकेट से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है।

 

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