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UP Crime: बिस्कुट का बहाना, डेढ़ साल की मासूम से दरिंदगी; POCSO कोर्ट ने 21 दिन में सुनाई उम्रकैद

UP Crime: बिस्कुट का बहाना, डेढ़ साल की मासूम से दरिंदगी; POCSO कोर्ट ने 21 दिन में सुनाई उम्रकैद

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की विशेष POCSO कोर्ट ने डेढ़ साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस मामले की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय होने के महज 21 दिनों के भीतर फैसला सुनाकर त्वरित न्याय की मिसाल पेश की। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दोषी को अपने शेष जीवनकाल तक कारावास की सजा भुगतनी होगी।

यह मामला 12 मार्च 2026 का है। पुलिस के अनुसार, खतौली थाना क्षेत्र में अपनी मां के साथ मायके आई करीब डेढ़ साल की बच्ची को रिश्ते में मामा लगने वाला आरोपी टिंकू उर्फ पिंकू बिस्कुट दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। कुछ देर बाद जब बच्ची रोते हुए वापस घर पहुंची तो उसके कपड़े खून से सने हुए थे। इसके बाद बच्ची की मां ने तत्काल खतौली थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने उसी दिन मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया। गिरफ्तारी के बाद से आरोपी लगातार न्यायिक हिरासत में रहा। जांच के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जुटाए तथा समयबद्ध तरीके से विवेचना पूरी कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ, मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन टीम और खतौली पुलिस ने पूरे मामले की लगातार निगरानी की। सभी गवाहों को समय पर अदालत में पेश कराया गया और अभियोजन पक्ष ने प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा।

सरकारी अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि आरोपी पीड़िता की मां के ताऊ का बेटा था और रिश्ते में बच्ची का मामा लगता था। उन्होंने बताया कि 3 जुलाई 2026 को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके बाद लगातार सुनवाई चली और केवल 21 दिनों में विशेष POCSO कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।

विशेष POCSO कोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धु ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और दो लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत के समक्ष इस मामले में कुल सात गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों, वैज्ञानिक साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी माना।

अपने फैसले में न्यायालय ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध अश्लील सामग्री को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि तकनीकी माध्यमों से अश्लील सामग्री की बढ़ती पहुंच वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि इस प्रकार की घटनाएं केवल मानवता को शर्मसार नहीं करतीं, बल्कि समाज में गिरते मानवीय मूल्यों की ओर भी संकेत करती हैं।

सरकारी अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि इस मामले में एडीजीसी प्रदीप कुमार बालियान और दिनेश कुमार शर्मा ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग, मजबूत साक्ष्यों की प्रस्तुति और समयबद्ध विवेचना के कारण अदालत से त्वरित न्याय संभव हो सका।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों, प्रभावी अभियोजन और समयबद्ध विवेचना की बदौलत इस संवेदनशील मामले में कम समय में फैसला आया। अधिकारियों ने इसे त्वरित न्याय व्यवस्था और अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

 

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